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पूजा सिंह: 14 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़कर एशियन U20 हाई जंप में रचा इतिहास

भारतीय एथलेटिक्स को एक नया सितारा मिल गया है। हरियाणा की युवा हाई जंप खिलाड़ी पूजा सिंह ने एशियन अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 में ऐसा प्रदर्शन किया है जिसने पूरे देश को गर्व से भर दिया है। मात्र 19 वर्ष की उम्र में उन्होंने 1.93 मीटर की शानदार छलांग लगाकर न केवल स्वर्ण पदक जीता, बल्कि 14 साल पुराना भारतीय राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी तोड़ दिया।

यह उपलब्धि केवल एक स्वर्ण पदक जीतने तक सीमित नहीं है। पूजा सिंह एशियन U20 चैंपियनशिप में महिला हाई जंप स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। उनकी यह सफलता भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो चुकी है।

हांगकांग में इतिहास रचने वाली छलांग

एशियन U20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 का आयोजन हांगकांग में हुआ, जहां एशिया के सर्वश्रेष्ठ युवा एथलीट अपनी प्रतिभा दिखाने पहुंचे थे। प्रतियोगिता के दौरान पूजा सिंह ने आत्मविश्वास और शानदार तकनीक का प्रदर्शन करते हुए 1.93 मीटर की ऊंचाई पार की। इस एक छलांग ने उन्हें स्वर्ण पदक दिलाया और भारतीय खेल इतिहास में उनका नाम दर्ज कर दिया।

इससे पहले भारतीय महिला हाई जंप का राष्ट्रीय रिकॉर्ड 1.92 मीटर था, जिसे अनुभवी एथलीट सहाना कुमारी ने 2012 में बनाया था। यह रिकॉर्ड 14 वर्षों तक अटूट रहा, लेकिन पूजा सिंह ने अपनी अद्भुत प्रतिभा से उसे पीछे छोड़ दिया।

रिकॉर्ड तोड़ने से भी बड़ी उपलब्धि

पूजा की 1.93 मीटर की छलांग कई कारणों से विशेष है।

  • 14 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूटा।
  • एशियन U20 चैंपियनशिप में भारत का पहला महिला हाई जंप स्वर्ण पदक मिला।
  • प्रतियोगिता का पुराना मीट रिकॉर्ड भी पीछे छूट गया।
  • 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के क्वालीफिकेशन मानक को भी पार कर लिया गया।

यह प्रदर्शन दर्शाता है कि पूजा केवल जूनियर स्तर की खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि आने वाले वर्षों में सीनियर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी भारत की बड़ी उम्मीद बन सकती हैं।

हरियाणा के छोटे गांव से अंतरराष्ट्रीय मंच तक

पूजा सिंह की कहानी संघर्ष और मेहनत की मिसाल है। उनका जन्म हरियाणा के फतेहाबाद जिले के एक साधारण परिवार में हुआ। उनके पिता निर्माण कार्य से जुड़े मजदूर हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने पूजा के सपनों को कभी छोटा नहीं होने दिया।

शुरुआती दिनों में उनके पास आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं नहीं थीं। कई बार उन्होंने बेहद साधारण उपकरणों के साथ अभ्यास किया। लेकिन उनके अंदर कुछ बड़ा करने की जिद थी। यही जिद धीरे-धीरे उन्हें राष्ट्रीय और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले गई।

योग शिविर से शुरू हुई यात्रा

दिलचस्प बात यह है कि पूजा सिंह की खेल यात्रा हाई जंप से शुरू नहीं हुई थी। उन्हें एक योग शिविर के दौरान कोच बलवान सिंह ने देखा था। उनकी शारीरिक लचक और संतुलन से प्रभावित होकर कोच ने उन्हें हाई जंप में प्रशिक्षण देना शुरू किया।

इसके बाद पूजा ने लगातार मेहनत की और कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनानी शुरू कर दी। उन्होंने जूनियर प्रतियोगिताओं में कई पदक जीते और धीरे-धीरे भारत की सबसे प्रतिभाशाली युवा हाई जंप खिलाड़ियों में शामिल हो गईं।

चोटों से लड़कर की वापसी

किसी भी खिलाड़ी का करियर हमेशा आसान नहीं होता। पूजा सिंह को भी गंभीर चोटों का सामना करना पड़ा। एक समय ऐसा आया जब लिगामेंट की चोट के कारण उन्हें लंबे समय तक खेल से दूर रहना पड़ा। कई खिलाड़ी ऐसी परिस्थितियों में हार मान लेते हैं, लेकिन पूजा ने वापसी का रास्ता चुना।

उन्होंने पुनर्वास, फिटनेस और तकनीकी प्रशिक्षण पर ध्यान दिया। धीरे-धीरे वे पहले से अधिक मजबूत होकर मैदान में लौटीं और आज परिणाम पूरी दुनिया के सामने है।

भारतीय एथलेटिक्स का नया चेहरा

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने नीरज चोपड़ा जैसे एथलीटों की वजह से ट्रैक एंड फील्ड खेलों में नई पहचान बनाई है। अब पूजा सिंह जैसी युवा खिलाड़ी इस सफलता को आगे बढ़ाने के लिए तैयार दिखाई देती हैं।

उनकी उम्र अभी केवल 19 वर्ष है और उन्होंने पहले ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उन्हें सही प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय अनुभव मिलता रहा तो वे आने वाले वर्षों में एशियाई खेलों, कॉमनवेल्थ गेम्स और यहां तक कि ओलंपिक में भी भारत के लिए पदक की दावेदार बन सकती हैं।

भारत के लिए गर्व का क्षण

पूजा सिंह की उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है। यह पूरे भारत के लिए गर्व का क्षण है। एक युवा खिलाड़ी का राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ना और एशिया के मंच पर स्वर्ण पदक जीतना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय खेलों का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।

उनकी सफलता उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो छोटे शहरों और गांवों से निकलकर बड़े सपने देखते हैं। पूजा ने साबित कर दिया है कि यदि प्रतिभा, मेहनत और समर्पण साथ हों तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।

निष्कर्ष

एशियन U20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 में पूजा सिंह का प्रदर्शन भारतीय खेल इतिहास के सबसे यादगार पलों में से एक बन चुका है। 1.93 मीटर की ऐतिहासिक छलांग, 14 साल पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड का अंत और स्वर्ण पदक की चमक—इन सबने उन्हें भारतीय एथलेटिक्स की नई स्टार बना दिया है।

आज पूरा देश उनकी सफलता का जश्न मना रहा है। लेकिन यह केवल शुरुआत है। जिस आत्मविश्वास और क्षमता का प्रदर्शन पूजा सिंह ने किया है, उसे देखकर लगता है कि आने वाले वर्षों में वे भारतीय एथलेटिक्स को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाली हैं।

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