
मुंबई, 3 अक्टूबर 2026: मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) की कार्रवाई ने कथित अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने रखी है। जांच एजेंसी ने एक ऐसे दो-तरफा गोल्ड और डायमंड स्मगलिंग सिंडिकेट का भंडाफोड़ करने की जानकारी दी है, जिसमें कथित तौर पर एक एयरपोर्ट कर्मचारी की मदद से विदेशी सोना भारत में लाया जा रहा था और दूसरी दिशा में भारत से हीरे दुबई भेजने की कोशिश की जा रही थी।
DRI के अनुसार, इस कार्रवाई में 8.564 किलोग्राम 24 कैरेट विदेशी मूल का सोना और 1,168.97 कैरेट हीरे जब्त किए गए हैं। जब्त सामग्री की कुल अनुमानित कीमत ₹13.73 करोड़ से अधिक बताई गई है। मामले में एक एयरपोर्ट कर्मचारी समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें छह ट्रांजिट यात्री और एक भारतीय आउटबाउंड यात्री भी शामिल हैं।
मामले की सबसे खास बात यह है कि जांच में सामने आया कथित नेटवर्क केवल सोना भारत लाने तक सीमित नहीं था। उसी एयरपोर्ट कर्मचारी पर कथित तौर पर दूसरी दिशा में हीरों की अवैध आवाजाही में मदद करने का भी आरोप है। यानी एक ही व्यक्ति कथित नेटवर्क में सोने के लिए रिसीवर और हीरों के लिए फैसिलिटेटर की भूमिका निभा रहा था।
शुरुआत हुई एक संदिग्ध हैंडओवर से
DRI के मुताबिक, 30 सितंबर 2026 को एजेंसी को मुंबई एयरपोर्ट पर एक कर्मचारी की गतिविधियों के बारे में विशेष खुफिया जानकारी मिली थी।
अधिकारियों ने कर्मचारी पर निगरानी रखी। इसी दौरान उसे एयरपोर्ट के डिपार्चर एरिया में एक भारतीय यात्री को कुछ सामान सौंपते हुए देखा गया। यह यात्री दुबई जाने वाला था।
जांचकर्ताओं के अनुसार, कर्मचारी भारतीय यात्री को हीरे सौंप रहा था, जिन्हें कथित तौर पर भारत से अवैध रूप से बाहर ले जाया जाना था।
यहीं से जांच ने एक अलग मोड़ लिया।
कर्मचारी की व्यक्तिगत तलाशी ली गई तो उसके पास तीन कैप्सूल मिले। इन कैप्सूल में मोम के रूप में रखी गई विदेशी मूल की सोने की धूल थी।
इसका मतलब यह था कि जिस व्यक्ति को अधिकारियों ने पहले हीरों के कथित हैंडओवर के दौरान पकड़ा था, उसके पास उसी समय कथित तौर पर विदेशी सोना भी मौजूद था।
यानी मामला सिर्फ हीरों की कथित तस्करी का नहीं था।
पूछताछ के बाद DRI को कथित नेटवर्क के दूसरे सदस्यों तक पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी मिली।
एक कर्मचारी, कई यात्री और कई अंतरराष्ट्रीय रूट
DRI की जांच के अनुसार, जिस ट्रांजिट यात्री ने कर्मचारी को सोने के कैप्सूल दिए थे, उसकी पहचान सामने आने के बाद उसे भी रोक लिया गया।
लेकिन पूछताछ और आगे की जानकारी से एजेंसी को पता चला कि कहानी में सिर्फ एक यात्री शामिल नहीं था।
एयरपोर्ट कर्मचारी ने कथित तौर पर बताया कि पांच और ट्रांजिट यात्री अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से मुंबई पहुंचने वाले थे और उन्हें भी सोने के कैप्सूल सौंपने थे।
इन यात्रियों के आने वाले शहरों में दुबई, दोहा, जेद्दा और फुजैरा शामिल थे।
दिलचस्प बात यह थी कि मुंबई उनका अंतिम गंतव्य नहीं था। सोना सौंपने के बाद उन्हें आगे सिंगापुर और ढाका की यात्रा करनी थी।
यानी कथित नेटवर्क ने अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट व्यवस्था का इस्तेमाल करते हुए मुंबई एयरपोर्ट को एक बीच के पड़ाव के रूप में इस्तेमाल किया।
DRI ने इन यात्रियों पर निगरानी बनाए रखी और उन्हें कथित तौर पर सोने के कैप्सूल एयरपोर्ट कर्मचारी को सौंपते समय रोका।
23 कैप्सूल में छिपा था 8.564 किलो सोना
जांच के दौरान कुल 23 कैप्सूल बरामद किए गए।
इनमें 24 कैरेट विदेशी मूल की सोने की धूल मोम के रूप में रखी गई थी।
DRI के अनुसार, बरामद सोने का कुल वजन 8.564 किलोग्राम था और इसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹12.64 करोड़ थी।
सोने को सामान्य बार या बिस्किट के रूप में ले जाने के बजाय धूल के रूप में तैयार कर कैप्सूल में छिपाना कथित नेटवर्क के इस्तेमाल किए गए तरीकों में से एक था।
ऐसे मामलों में तस्कर अक्सर सामान को छोटे और आसानी से छिपाए जा सकने वाले रूप में बदलने की कोशिश करते हैं। लेकिन इस मामले में DRI की विशिष्ट खुफिया जानकारी और निगरानी के कारण कथित हैंडओवर अधिकारियों की नजर में आ गया।
कहानी का दूसरा हिस्सा — हीरे दुबई भेजने की तैयारी
अगर केवल 8.564 किलो सोने की बरामदगी होती तो मामला एक सामान्य गोल्ड-स्मगलिंग केस की तरह दिखाई दे सकता था।
लेकिन जांच में दूसरा हिस्सा सामने आया—हीरे।
DRI के अनुसार, एयरपोर्ट कर्मचारी भारतीय यात्री को हीरे सौंप रहा था। इस यात्री को दुबई जाना था और कथित तौर पर इन हीरों को भारत से अवैध तरीके से बाहर ले जाने की कोशिश की जा रही थी।
कुल 1,168.97 कैरेट हीरे बरामद किए गए।
इनमें:
- 132.17 कैरेट प्राकृतिक हीरे
- 1,036.80 कैरेट लैब-ग्रोवन हीरे
शामिल थे।
DRI ने इनकी कुल अनुमानित कीमत लगभग ₹1.09 करोड़ बताई है।
इस तरह सोने और हीरों की संयुक्त अनुमानित कीमत ₹13.73 करोड़ से अधिक हो गई।
‘दो-तरफा’ मॉडल ने चौंकाया
इस मामले को खास बनाने वाली बात DRI द्वारा बताई गई two-way modus operandi है।
आमतौर पर तस्करी के मामलों में किसी नेटवर्क को एक दिशा में अवैध सामान ले जाते हुए पकड़ा जाता है। लेकिन यहां जांच एजेंसी के मुताबिक वही एयरपोर्ट कर्मचारी कथित तौर पर दोनों दिशाओं में गतिविधि को आसान बना रहा था।
एक तरफ:
विदेशी मूल का सोना → अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट यात्री → एयरपोर्ट कर्मचारी → भारत में अवैध तरीके से निकालने की कोशिश
दूसरी तरफ:
हीरे → एयरपोर्ट कर्मचारी → भारतीय आउटबाउंड यात्री → दुबई भेजने की कथित कोशिश
यही कथित व्यवस्था इस मामले को सामान्य बरामदगी से अलग बनाती है।
DRI ने इसे संगठित तस्करी नेटवर्क का उदाहरण बताया है जिसमें एयरपोर्ट के अंदर काम करने वाले व्यक्ति की कथित भूमिका महत्वपूर्ण थी।
एयरपोर्ट कर्मचारी की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था में एयरपोर्ट और एयरलाइन कर्मचारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।
यात्रियों को जहां सामान्य सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ता है, वहीं अधिकृत कर्मचारियों को उनके काम के आधार पर एयरपोर्ट के विभिन्न हिस्सों तक पहुंच मिल सकती है।
ऐसी स्थिति में यदि कोई कर्मचारी कथित तौर पर तस्करी नेटवर्क से जुड़ता है, तो वह नेटवर्क को ऐसी जगहों तक पहुंच दिला सकता है जहां आम यात्री की पहुंच नहीं होती।
यही कारण है कि DRI ने इस कार्रवाई में insider threat को विशेष रूप से रेखांकित किया है।
एजेंसी के मुताबिक, यह मामला दिखाता है कि संगठित तस्करी नेटवर्क एयरपोर्ट कर्मचारियों और अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट यात्रियों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
सिर्फ एक मामला नहीं, मुंबई एयरपोर्ट पहले भी जांच के केंद्र में रहा
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब DRI मुंबई एयरपोर्ट से जुड़े कई कथित गोल्ड-स्मगलिंग नेटवर्क पर कार्रवाई कर चुकी है।
सितंबर में DRI ने एक अलग कार्रवाई में मुंबई एयरपोर्ट पर 3.47 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना जब्त करने और पांच लोगों को गिरफ्तार करने की जानकारी दी थी। उस मामले में भी ट्रांजिट यात्रियों और एयरपोर्ट कर्मचारियों की कथित भूमिका सामने आई थी।
उस कार्रवाई में अधिकारियों ने बताया था कि एयरपोर्ट कर्मचारी को कथित तौर पर सोना सौंपा जा रहा था और उसे एयरपोर्ट से बाहर निकालने की कोशिश की जा रही थी।
एक अन्य हालिया कार्रवाई में DRI ने मुंबई एयरपोर्ट पर 9.40 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना, जिसकी अनुमानित कीमत करीब ₹15 करोड़ बताई गई, जब्त करने और तीन भारतीय यात्रियों को गिरफ्तार करने की जानकारी दी थी।
इससे पता चलता है कि मुंबई एयरपोर्ट देश में सोने की कथित अवैध आवाजाही को लेकर जांच एजेंसियों के लिए लगातार महत्वपूर्ण स्थान बना हुआ है।
तस्करी के तरीके लगातार बदल रहे हैं
DRI की हालिया कार्रवाइयों को देखें तो सोने की कथित तस्करी के तरीके काफी विविध दिखाई देते हैं।
सितंबर में देशभर में की गई कई कार्रवाइयों में एजेंसी ने बताया था कि विदेशी सोने को कैप्सूल, वाहनों के विशेष रूप से बनाए गए हिस्सों, मशीनों, ट्रेन यात्रियों और एयरपोर्ट ट्रांजिट रूट्स के जरिए छिपाकर ले जाने की कोशिश की गई।
एक मामले में सोने को ट्रेडमिल की मोटर में छिपाने का तरीका सामने आया था। दूसरे मामले में वाहन के गियरबॉक्स के नीचे बनाए गए हिस्से में सोना छिपाया गया था। कुछ मामलों में शरीर पर विशेष रूप से तैयार किए गए कपड़ों में सोना छिपाने की कोशिश की गई।
यानी तस्करी नेटवर्क लगातार नए तरीके इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं।
सितंबर में DRI की देशभर में बड़ी कार्रवाई
मुंबई का यह मामला किसी एक अलग घटना के रूप में नहीं देखा जा रहा।
10 सितंबर को DRI ने बताया था कि विभिन्न इंटेलिजेंस-आधारित कार्रवाइयों में उसने लगभग 41 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना, जिसकी कीमत करीब ₹62 करोड़ बताई गई, जब्त किया था।
इन कार्रवाइयों में 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें तीन विदेशी नागरिक भी शामिल थे। एजेंसी ने बताया था कि नेटवर्क एयरपोर्ट, रेलवे मार्ग और भारत-बांग्लादेश सीमा सहित कई रास्तों का इस्तेमाल कर रहे थे।
इसके बाद भी सोने की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई जारी रही।
28 सितंबर को DRI ने देश के अलग-अलग शहरों में एक साथ कार्रवाई कर लगभग 6.61 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना, जिसकी कीमत लगभग ₹10.36 करोड़ बताई गई, जब्त करने और 11 लोगों को गिरफ्तार करने की जानकारी दी थी।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि सोने की कथित तस्करी के खिलाफ एजेंसी की कार्रवाई कई राज्यों और अलग-अलग परिवहन माध्यमों तक फैली हुई है।
अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?
मुंबई एयरपोर्ट के इस मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी के बाद भी जांच का दायरा बड़ा हो सकता है।
सबसे पहला सवाल यह है कि इस नेटवर्क का मुख्य संचालक या मास्टरमाइंड कौन था?
दूसरा सवाल है कि विदेश से आने वाले यात्रियों को कथित तौर पर सोना कौन उपलब्ध करा रहा था।
तीसरा सवाल यह है कि भारत से बाहर भेजे जाने वाले हीरे कहां से आए और उनकी अंतिम डिलीवरी किसे होनी थी।
इसके अलावा, जांचकर्ता यह भी देख सकते हैं कि क्या इस नेटवर्क में और एयरपोर्ट कर्मचारी या अन्य मध्यस्थ शामिल थे।
अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क में अक्सर सामान ले जाने वाला व्यक्ति पूरे नेटवर्क का प्रमुख नहीं होता। उसके ऊपर और भी लोग हो सकते हैं जो सामान की व्यवस्था, पैसे का लेनदेन और अंतिम डिलीवरी संभालते हों।
इसलिए गिरफ्तारियां जांच का अंत नहीं बल्कि आगे की जांच की शुरुआत हो सकती हैं।
मुंबई एयरपोर्ट क्यों बनता है अहम ट्रांजिट पॉइंट?
मुंबई भारत के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय विमानन केंद्रों में से एक है और यहां हर दिन बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय उड़ानें आती-जाती हैं।
दुबई, दोहा, जेद्दा और अन्य पश्चिम एशियाई शहरों से आने-जाने वाली उड़ानों के कारण मुंबई का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क काफी बड़ा है।
तस्करी नेटवर्क के लिए यह कथित तौर पर इसलिए आकर्षक हो सकता है क्योंकि अलग-अलग देशों से आने वाले यात्री मुंबई को ट्रांजिट पॉइंट के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।
हालांकि, किसी भी ट्रांजिट यात्री की मौजूदगी अपने आप में संदिग्ध नहीं होती। इस मामले में संदिग्ध गतिविधियों की पहचान विशिष्ट खुफिया जानकारी और जांच के आधार पर की गई।
कानूनी कार्रवाई जारी
DRI के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आठों लोगों के खिलाफ Customs Act, 1962 की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
जब्त सोना और हीरे फिलहाल जांच का हिस्सा हैं और बरामदगी की कीमतें DRI द्वारा दी गई अनुमानित कीमतों पर आधारित हैं।
अदालत में आगे की कार्यवाही के दौरान आरोपों, सबूतों और प्रत्येक आरोपी की भूमिका की जांच होगी। इसलिए आरोपों को अंतिम दोषसिद्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
असली ‘खेल’ अभी बाकी?
मुंबई एयरपोर्ट की इस कार्रवाई ने कथित तस्करी नेटवर्क की एक ऐसी तस्वीर सामने रखी है जिसमें सोना एक दिशा में और हीरे दूसरी दिशा में ले जाने की कोशिश की जा रही थी।
8.564 किलो विदेशी सोना, 1,168.97 कैरेट हीरे और आठ गिरफ्तारियां—ये आंकड़े इस कार्रवाई का पैमाना बताते हैं।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल बरामदगी की कीमत नहीं, बल्कि नेटवर्क की पूरी संरचना है।
क्या गिरफ्तार किए गए लोग केवल कूरियर और हैंडलर थे? क्या इनके पीछे कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क है? विदेश से सोना किस स्रोत से आ रहा था? भारत से हीरे किसके लिए भेजे जा रहे थे? और एयरपोर्ट के अंदर कथित तौर पर कितने लोग इस व्यवस्था से जुड़े हो सकते हैं?
इन सवालों के जवाब आगे की जांच से सामने आएंगे।
फिलहाल DRI की कार्रवाई ने इतना जरूर दिखा दिया है कि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट केवल यात्रियों की आवाजाही के केंद्र नहीं हैं, बल्कि संगठित तस्करी नेटवर्क भी इन्हें निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं।
और इस मामले में कथित तरीका और भी दिलचस्प है—एक ही एयरपोर्ट कर्मचारी, एक तरफ विदेशी सोने की कथित रिसीविंग और दूसरी तरफ हीरों की कथित आउटबाउंड डिलीवरी।
यही वजह है कि मुंबई एयरपोर्ट का यह मामला फिलहाल देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है और जांच आगे बढ़ने के साथ कथित नेटवर्क की और परतें खुलने की संभावना है।
