
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर संभावित समझौते ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। ईरान का कहना है कि ओमान के साथ नए समुद्री मार्ग तय करने वाला समझौता अंतिम चरण में है, लेकिन रणनीतिक जलमार्ग को पूरी तरह खोलने के लिए अमेरिका को तेहरान की कई मांगें पूरी करनी होंगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां किसी भी लंबे समय तक चलने वाली रुकावट का असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कच्चे तेल की कीमतों, ईंधन लागत, महंगाई और वैश्विक व्यापार पर भी पड़ सकता है।
क्या है पूरा मामला?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया है कि तेहरान और मस्कट के बीच समुद्री मार्गों से संबंधित समझौता अंतिम चरण में पहुंच चुका है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत होर्मुज के जरिए वाणिज्यिक जहाजों के आवागमन के लिए नए मार्ग निर्धारित किए जा सकते हैं। हालांकि, ईरान ने साफ किया है कि इस समझौते का मतलब तत्काल रूप से जलडमरूमध्य खोलना नहीं है।
ईरान का कहना है कि जलमार्ग को फिर से खोलने के लिए अमेरिका को कुछ अतिरिक्त शर्तों पर सहमत होना होगा। इनमें सैन्य हमलों से हुए नुकसान के लिए मुआवजा, प्रतिबंधों में राहत और ईरान के खिलाफ सैन्य धमकियां रोकना शामिल हैं। दोनों देशों के बीच फिलहाल सीधे बातचीत नहीं हो रही है, लेकिन मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान जारी है।
दुनिया के लिए क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज?
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। वैश्विक ऊर्जा व्यापार में इसकी भूमिका इतनी बड़ी है कि यहां लंबे समय तक व्यवधान पैदा होने पर दुनिया के कई देशों में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
यही वजह है कि ईरान और ओमान के बीच संभावित समझौते पर अंतरराष्ट्रीय बाजारों की नजर बनी हुई है।
हाल के घटनाक्रमों में तेल की कीमतों ने भी इस अनिश्चितता पर प्रतिक्रिया दी है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 84.40 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा, जबकि अमेरिकी WTI करीब 78.80 डॉलर पर कारोबार कर रहा था। बाजार अभी भी इस बात को लेकर सतर्क है कि होर्मुज वास्तव में कब और किस शर्त पर खुलेगा।
अमेरिका और ईरान के बीच मतभेद
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी चुनौती अमेरिका और ईरान के बीच गहरे राजनीतिक और सुरक्षा मतभेद हैं।
ईरान का कहना है कि वह सीधे अमेरिकी बातचीत में तब तक शामिल नहीं होगा जब तक वॉशिंगटन जून में हुए अंतरिम समझौते का पालन नहीं करता। वहीं अमेरिका की ओर से संकेत दिए गए हैं कि यदि ईरान अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करता है तो समुद्री मार्ग को सामान्य बनाने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।
इस स्थिति में ओमान की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो गई है। ओमान लंबे समय से क्षेत्रीय विवादों में मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है और इस बार भी वह दोनों पक्षों के बीच संवाद का माध्यम बना हुआ है।
तेल बाजार पर सीधा असर
होर्मुज की स्थिति का सबसे तत्काल प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार पर देखने को मिल रहा है।
हालांकि समझौते की खबरों के कारण पिछले सप्ताह तेल कीमतों में गिरावट आई थी, लेकिन ईरान की नई शर्तों के बाद सोमवार को कीमतों में फिर तेजी दिखाई दी। बाजार विशेषज्ञों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या वास्तव में सुरक्षित और नियमित टैंकर आवाजाही शुरू होगी।
यदि जलडमरूमध्य पूरी तरह खुलता है और जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है, तो तेल आपूर्ति को लेकर बाजार की चिंता कम हो सकती है। इसके विपरीत, यदि बातचीत फिर से विफल होती है, तो ऊर्जा कीमतों में दोबारा तेजी आने की संभावना बाजार के लिए महत्वपूर्ण जोखिम बनी रहेगी।
इसका असर एशिया और यूरोप के उन देशों पर भी पड़ सकता है जो मध्य पूर्व से बड़ी मात्रा में ऊर्जा आयात करते हैं।
क्षेत्रीय तनाव भी बरकरार
होर्मुज को लेकर बातचीत के बावजूद मध्य पूर्व में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। यमन में ईरान समर्थित हूती समूह की गतिविधियों ने भी समुद्री सुरक्षा को प्रभावित किया है। हाल ही में सऊदी अरब ने तुर्की और पाकिस्तान के साथ एक नए रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण में एक और महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है।
इसका अर्थ है कि केवल ईरान और अमेरिका के बीच समझौता होने से पूरे क्षेत्र में स्थिरता तुरंत वापस आना जरूरी नहीं है। समुद्री मार्गों की सुरक्षा, क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियां और विभिन्न देशों के बीच गठजोड़ भी आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
क्या खुल सकता है होर्मुज?
फिलहाल सबसे सकारात्मक संकेत यह है कि ईरान और ओमान समुद्री मार्गों को लेकर समझौते के अंतिम चरण में पहुंचने की बात कर रहे हैं। लेकिन ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि नए समुद्री मार्गों का समझौता और जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलना दो अलग-अलग मुद्दे हैं।
इसलिए आने वाले दिनों में असली परीक्षा समझौते की घोषणा नहीं, बल्कि उसका जमीन पर लागू होना होगा।
अगर अमेरिका और ईरान अपनी शर्तों पर समझौता कर लेते हैं और सुरक्षित जहाज आवाजाही शुरू होती है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार को बड़ी राहत मिल सकती है। लेकिन यदि दोनों देशों के बीच राजनीतिक मतभेद फिर बढ़ते हैं, तो होर्मुज की अनिश्चितता लंबे समय तक वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बनी रह सकती है।
फिलहाल दुनिया की नजर ओमान की मध्यस्थता, अमेरिका-ईरान के अप्रत्यक्ष संपर्क और होर्मुज जलडमरूमध्य में वास्तविक समुद्री आवाजाही पर टिकी है।
