स्मार्टफोन के बाद अगली बड़ी टेक्नोलॉजी बनने की दौड़ में AI Smart Glasses तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन जैसे-जैसे कैमरा और AI असिस्टेंट वाले चश्मे लोकप्रिय हो रहे हैं, वैसे-वैसे लोगों की प्राइवेसी और बिना जानकारी रिकॉर्डिंग को लेकर सवाल भी बढ़ रहे हैं।
एक समय स्मार्टफोन को अगली बड़ी consumer technology माना जाता था। अब टेक कंपनियां उससे आगे की ओर देख रही हैं और AI-powered smart glasses को अगली बड़ी डिवाइस कैटेगरी बनाने की कोशिश कर रही हैं।
AI वाले स्मार्ट glasses अब सिर्फ notifications दिखाने तक सीमित नहीं हैं। इनमें कैमरा, microphone, voice assistant और AI-based features शामिल किए जा रहे हैं।
लेकिन इस नई टेक्नोलॉजी के साथ एक पुरानी समस्या और बड़ी हो गई है—privacy।
Reuters की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार AI-powered wearable devices को लेकर दुनिया भर में privacy concerns बढ़ रहे हैं। विशेष रूप से camera-equipped smart glasses ने public spaces में covert recording और personal data को लेकर चिंता पैदा की है।
चश्मे में कैमरा और AI आखिर कर क्या सकते हैं?
नई पीढ़ी के smart glasses कई काम कर सकते हैं।
उदाहरण के लिए, यूजर किसी वस्तु के बारे में सवाल पूछ सकता है और AI कैमरे से मिली जानकारी के आधार पर जवाब दे सकता है।
कुछ devices voice commands भी समझ सकते हैं और smartphone को बार-बार हाथ में निकालने की जरूरत कम कर सकते हैं।
भविष्य में ऐसे glasses navigation, translation, reminders, photography और real-time information जैसे कामों में भी उपयोग किए जा सकते हैं।
यही कारण है कि बड़ी टेक कंपनियां इस category में तेजी से निवेश कर रही हैं।
लेकिन असली सवाल है—कैमरा किसे रिकॉर्ड कर रहा है?
स्मार्टफोन से फोटो लेने पर आम तौर पर व्यक्ति फोन निकालता है, कैमरा खोलता है और सामने वाला समझ सकता है कि फोटो ली जा रही है।
Smart glasses में स्थिति अलग हो सकती है।
अगर कैमरा चश्मे के frame में लगा हो, तो आसपास मौजूद व्यक्ति के लिए यह हमेशा स्पष्ट नहीं होगा कि उसे रिकॉर्ड किया जा रहा है या नहीं।
यहीं से privacy का सवाल उठता है।
Reuters के अनुसार Meta के AI-integrated Ray-Ban smart glasses को लेकर lawsuits और public concerns सामने आए हैं, जिनमें covert recording और privacy से जुड़े आरोप शामिल हैं।
कंपनियां इसका समाधान कैसे खोज रही हैं?
टेक कंपनियां अब ऐसे designs और features पर काम कर रही हैं जो यूजर और आसपास के लोगों को ज्यादा control दें।
कुछ कंपनियां camera-free glasses पर काम कर रही हैं।
दूसरी तरफ कुछ startups ऐसे devices बना रहे हैं जिनमें recording के लिए स्पष्ट user activation की जरूरत होती है।
Reuters की रिपोर्ट में Even Realities, Pocket और Plaud जैसे startups का उल्लेख किया गया है, जो अलग-अलग तरीकों से user control और transparency को महत्व देने की कोशिश कर रहे हैं।
AI और personal data
Privacy की चिंता केवल कैमरे तक सीमित नहीं है।
AI glasses को उपयोगी बनाने के लिए उन्हें कई तरह के data की जरूरत पड़ सकती है।
उदाहरण के लिए:
- आवाज
- location
- images
- conversations
- आसपास की चीजों की जानकारी
- user preferences
- search history
अगर इन सभी चीजों को cloud servers पर भेजा जाए तो data security एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।
इसी कारण कुछ कंपनियां local processing को बढ़ावा दे रही हैं, ताकि ज्यादा data device पर ही process हो सके।
Reuters के अनुसार OpenAI CEO Sam Altman ने भी user trust बढ़ाने के लिए local data processing को महत्व दिया है।
क्या Smart Glasses स्मार्टफोन की जगह ले पाएंगे?
अभी इसका जवाब साफ नहीं है।
Smartphone में बड़ा display, keyboard, powerful applications और कई वर्षों से विकसित ecosystem है।
Smart glasses का फायदा उनका hands-free experience है।
अगर AI इतना बेहतर हो जाए कि यूजर केवल बोलकर जानकारी प्राप्त कर सके, navigation कर सके, तस्वीरें ले सके और जरूरी काम कर सके, तो glasses कई situations में smartphone की जरूरत कम कर सकते हैं।
लेकिन पूरी तरह smartphone replacement बनने के लिए अभी काफी तकनीकी और सामाजिक चुनौतियां बाकी हैं।
$600 billion का बाजार?
Reuters ने इस emerging wearable market को smartphone ecosystem के संदर्भ में लगभग $600 billion के projected market opportunity से जोड़ा है।
इसी वजह से कंपनियां इस क्षेत्र में पीछे नहीं रहना चाहतीं।
अगर smart glasses बड़े पैमाने पर लोकप्रिय होते हैं, तो यह केवल एक नया gadget category नहीं होगा।
यह advertising, social media, AI assistants, photography और personal computing के तरीके को भी बदल सकता है।
आगे की सबसे बड़ी चुनौती
Smart glasses को सफल बनाने के लिए केवल बेहतर AI काफी नहीं होगा।
लोगों को यह भरोसा भी होना चाहिए कि:
“मेरे आसपास कौन रिकॉर्ड हो रहा है, मेरा data कहां जा रहा है और उसे कौन देख सकता है?”
इन सवालों के स्पष्ट जवाब मिलने पर ही wearable AI technology को बड़े पैमाने पर स्वीकार्यता मिल सकती है।
इसलिए आने वाले वर्षों में smart glasses की सबसे बड़ी प्रतियोगिता केवल battery life, camera quality या AI performance की नहीं होगी।
Privacy और user trust भी इस नई technology की सफलता का बड़ा हिस्सा होंगे।
