
मुंबई/पुणे | 3 अक्टूबर 2026
महाराष्ट्र में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों के लिए पिछले कुछ हफ्ते बेहद उथल-पुथल भरे रहे हैं। महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) से जुड़ी परीक्षा में कथित पेपर लीक के मामले ने अब इतना बड़ा रूप ले लिया है कि एक भर्ती प्रक्रिया रद्द की जा चुकी है, कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, बड़ी परीक्षाओं को टाल दिया गया है और 2025 की State Services परीक्षा की answer sheets दोबारा जांचने का फैसला लिया गया है।
सबसे ताजा घटनाक्रम में महाराष्ट्र सरकार ने MPSC के सचिव महेंद्र हरपलकर की deputation समाप्त कर दी है। यह फैसला ऐसे समय में हुआ है जब पुणे में प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थी लगातार आंदोलन कर रहे हैं और आयोग की कार्यप्रणाली में जवाबदेही तथा पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
इस पूरे मामले की शुरुआत MPSC की Drug Inspector, Group-B भर्ती परीक्षा से जुड़े कथित प्रश्नपत्र लीक से हुई थी। लेकिन अब विवाद केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहा है। परीक्षार्थियों ने मूल्यांकन, परीक्षा कार्यक्रम, प्रश्नपत्र सुरक्षा और आयोग की communication व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
Drug Inspector भर्ती परीक्षा में क्या हुआ?
MPSC ने Food and Drug Administration विभाग में Drug Inspector के Group-B पदों पर भर्ती के लिए screening examination आयोजित की थी। यह परीक्षा 22 मार्च 2026 को हुई थी।
बाद में उम्मीदवारों और अन्य लोगों से प्रश्नपत्र लीक होने की शिकायतें मिलने लगीं। MPSC को 22 से 26 जुलाई के बीच इस संबंध में शिकायतें प्राप्त हुई थीं। प्रारंभिक पुलिस जांच के बाद आयोग ने भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने का फैसला किया।
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ी क्योंकि उस भर्ती प्रक्रिया में 488 उम्मीदवार interview stage तक पहुंच चुके थे, लेकिन कथित पेपर लीक की जांच के बाद पूरी recruitment process को ही रद्द कर दिया गया।
इसका सीधा असर उन उम्मीदवारों पर पड़ा जिन्होंने महीनों की तैयारी के बाद परीक्षा दी थी और चयन प्रक्रिया के अगले चरण तक पहुंचे थे।
एक शिकायत से खुला मामला
पुलिस के अनुसार मामले में शुरुआती तौर पर एक उम्मीदवार को leaked paper का लाभ मिलने की बात सामने आई थी। बाद की जांच में तस्वीर बड़ी होती गई।
सितंबर में पुलिस ने एक महिला उम्मीदवार को कथित तौर पर leaked question paper की मुख्य beneficiary के रूप में गिरफ्तार किया था। मामले में यह भी सामने आया कि उसके boyfriend ने MPSC को email करके आरोप लगाया था कि परीक्षा के प्रश्न पहले से लीक हो चुके थे।
इसके बाद जांच आगे बढ़ी और पुलिस ने अन्य candidates तथा कथित middlemen को भी गिरफ्तार किया।
अब तक 11 लोगों की गिरफ्तारी
मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, आरोपियों की संख्या बढ़ती गई।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार मुंबई Crime Branch ने चार और लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें दो उम्मीदवार और दो कथित बिचौलिए शामिल थे। इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों की कुल संख्या 11 तक पहुंच गई।
इससे जांच एजेंसियों के सामने यह सवाल भी आया कि आखिर leaked paper कितने लोगों तक पहुंचा था और इसके पीछे पूरा नेटवर्क किस तरह काम कर रहा था।
पुलिस अब कथित तौर पर पैसे के लेनदेन और आरोपियों के बीच संपर्कों की भी जांच कर रही है।
तीन उम्मीदवारों की रैंक ने बढ़ाई चिंता
जांच के दौरान पुलिस ने एक और महत्वपूर्ण बात कही।
Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस का दावा है कि leaked paper पाने वाले तीन उम्मीदवारों ने परीक्षा में तीसरी, चौथी और सातवीं रैंक हासिल की।
अगर जांच में यह आरोप अदालत में साबित होता है, तो इससे परीक्षा की निष्पक्षता और selection process पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि पुलिस द्वारा लगाए गए आरोप और जांच के निष्कर्ष अदालत में अंतिम रूप से साबित होना बाकी हैं।
सबूत मिटाने की कोशिश का भी आरोप
जांच एजेंसियों के सामने सिर्फ paper leak का सवाल नहीं है, बल्कि कथित तौर पर evidence मिटाने का मुद्दा भी सामने आया है।
मुंबई Crime Branch के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में से कुछ ने कथित तौर पर अपने मोबाइल फोन और laptops को नुकसान पहुंचाया या उन्हें फेंक दिया, ताकि डिजिटल सबूत नष्ट किए जा सकें। पुलिस अब इन devices को recover करने और leaked paper के बदले हुए कथित पैसों के लेनदेन का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
अगर जांच में ये आरोप साबित होते हैं तो मामला सिर्फ प्रश्नपत्र की चोरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि evidence destruction और संबंधित आपराधिक धाराओं का पहलू भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
भर्ती ही रद्द कर दी गई
MPSC ने अंततः Drug Inspector recruitment process को रद्द करने का फैसला किया।
यह निर्णय उन उम्मीदवारों के लिए बड़ा झटका था जो पहले ही screening examination, result और interview process तक पहुंच चुके थे। आयोग ने कहा कि preliminary police inquiry में question paper के परीक्षा से पहले leak होने की बात सामने आने के बाद भर्ती प्रक्रिया रद्द की गई।
अब इस भर्ती को दोबारा किस तरीके से आयोजित किया जाएगा, यह अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण सवाल है।
विवाद सिर्फ एक परीक्षा तक नहीं रहा
Drug Inspector paper leak के बाद MPSC की दूसरी परीक्षाओं को लेकर भी अभ्यर्थियों की चिंताएं सामने आने लगीं।
MPSC ने State Services Main Examination 2026, Civil Engineering Main Examination 2026 और Group-B Non-Gazetted Main Examination 2026 को स्थगित कर दिया है। State Services Main Examination 3 अक्टूबर से शुरू होने वाली थी, लेकिन अब इसकी नई तारीख बाद में घोषित की जाएगी।
इसके साथ ही आयोग ने State Services Examination 2025 की answer sheets को दोबारा evaluate करने का भी फैसला किया है।
यानी मामला अब केवल question paper security तक सीमित नहीं है। Evaluation process पर भी दोबारा नजर डाली जा रही है।
पुणे में अभ्यर्थियों का आंदोलन
परीक्षा से जुड़े विवाद के बीच पुणे में बड़ी संख्या में MPSC aspirants सड़कों पर उतरे।
अभ्यर्थियों ने आयोग के कामकाज, paper leaks और परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन किया। हाल के दिनों में पुणे में छात्रों ने मार्च निकाला और MPSC chairperson तथा अधिकारियों से जवाबदेही की मांग की।
3 अक्टूबर को भी पुणे में अभ्यर्थियों का protest जारी रहा। रिपोर्ट के अनुसार छात्रों ने MPSC chairperson विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग की।
यह आंदोलन बताता है कि विवाद का असर केवल एक recruitment exam के उम्मीदवारों तक सीमित नहीं है। अन्य competitive exam aspirants भी परीक्षा प्रणाली में ज्यादा transparency और निश्चित schedule की मांग कर रहे हैं।
सरकार ने बनाई Examination Reform Committee
विवाद बढ़ने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने examination system में सुधार के लिए एक high-level committee बनाई।
इस committee को छात्रों और अन्य stakeholders से सुझाव लेने की जिम्मेदारी दी गई। सितंबर तक committee को 20,000 से अधिक emails मिल चुके थे। उम्मीदवारों ने fixed examination calendar, transparent evaluation, timely results और question paper security जैसे मुद्दे उठाए।
Committee ने अलग-अलग शहरों में जाकर अभ्यर्थियों से बातचीत की और परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं पर feedback लिया।
अभ्यर्थियों की मांगों में examination centres के लिए uniform SOP, question papers की सुरक्षा, invigilators की training, evaluation procedures और official communication system को मजबूत करना भी शामिल था।
MPSC सचिव पर भी हुई कार्रवाई
अब ताजा घटनाक्रम में महाराष्ट्र सरकार ने MPSC सचिव महेंद्र हरपलकर की deputation समाप्त कर दी है।
3 अक्टूबर की रिपोर्टों के अनुसार उन्हें पद का charge तुरंत किसी अन्य अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने इसे administrative reasons से जुड़ा आदेश बताया है।
यह कदम उस समय आया है जब परीक्षा अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार जारी है और MPSC की कार्यप्रणाली को लेकर दबाव बढ़ा हुआ है।
न्यायिक जांच की घोषणा
इस विवाद में सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाने की घोषणा की है।
महाराष्ट्र सरकार ने MPSC की functioning से जुड़े मुद्दों की judicial inquiry कराने की बात कही है। Hindustan Times के अनुसार जांच में आयोग के पूर्व और वर्तमान chairpersons तथा members की कार्यप्रणाली को भी देखा जाएगा और जांच को तीन महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस जांच से यह स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि परीक्षा व्यवस्था में कहां और किस स्तर पर खामियां थीं।
हजारों उम्मीदवारों के सामने सबसे बड़ा सवाल
MPSC जैसी competitive examinations में उम्मीदवार कई वर्षों तक तैयारी करते हैं। एक परीक्षा का schedule बदलने या recruitment cancel होने का असर सिर्फ एक तारीख पर नहीं पड़ता।
उम्मीदवारों की उम्र, दूसरे examinations की तैयारी, आर्थिक खर्च और career planning सभी प्रभावित हो सकते हैं।
इसी वजह से aspirants अब सिर्फ leaked paper के आरोपियों पर कार्रवाई की मांग नहीं कर रहे, बल्कि पूरी examination system को ज्यादा predictable और transparent बनाने की मांग कर रहे हैं।
उनकी प्रमुख मांगों में fixed exam calendar, समय पर results, स्पष्ट communication, मजबूत question-paper security और evaluation process में transparency शामिल है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल तीन मोर्चों पर घटनाक्रम आगे बढ़ रहा है।
पहला, Drug Inspector paper leak case की police investigation, जिसमें अब तक 11 लोगों की गिरफ्तारी की खबर है।
दूसरा, MPSC examination reforms, जिसके लिए सरकार की committee अभ्यर्थियों और experts से सुझाव ले रही है।
तीसरा, स्थगित परीक्षाओं और re-evaluation की प्रक्रिया, जिसमें State Services Main 2026 समेत कई exams की नई तारीखों और 2025 answer sheets की दोबारा जांच का इंतजार है।
फिलहाल जांच में सामने आए आरोपों को अदालत के अंतिम निर्णय के रूप में नहीं देखा जा सकता। लेकिन इतना स्पष्ट है कि कथित paper leak ने महाराष्ट्र की competitive examination system को लेकर बड़ा प्रशासनिक और सार्वजनिक विवाद खड़ा कर दिया है।
हजारों अभ्यर्थियों के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या आने वाले महीनों में MPSC की परीक्षा व्यवस्था ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से वापस पटरी पर आ पाएगी?
