
आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में बहुत से लोग खुद को स्वस्थ मानते हैं क्योंकि उन्हें कोई बड़ी बीमारी नहीं है। लेकिन हमारी रोज़मर्रा की छोटी-छोटी आदतें लंबे समय में स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं। देर रात खाना, बहुत अधिक नमक लेना, घंटों स्क्रीन देखना, शारीरिक गतिविधि की कमी और खाने के तुरंत बाद लेटना जैसी आदतें अक्सर सामान्य लगती हैं, लेकिन कुछ परिस्थितियों में ये स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि किसी एक आदत को किसी बीमारी का सीधा कारण नहीं माना जा सकता। स्वास्थ्य पर उम्र, आनुवंशिकता, भोजन, नींद, पर्यावरण, दवाएं और अन्य कई कारकों का प्रभाव पड़ता है। इसलिए नीचे दी गई सूची को सामान्य स्वास्थ्य-जागरूकता के रूप में देखें, चिकित्सा निदान के रूप में नहीं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, अस्वास्थ्यकर आहार, शारीरिक निष्क्रियता और अधिक नमक जैसे कारक कई गैर-संचारी रोगों के जोखिम से जुड़े हैं।
1. डायबिटीज – देर रात खाने की आदत
देर रात खाना हर व्यक्ति में डायबिटीज का कारण नहीं बनता, लेकिन भोजन का समय शरीर के मेटाबॉलिज्म और ब्लड शुगर नियंत्रण से जुड़ा हो सकता है। CDC के अनुसार, डायबिटीज से पीड़ित लोगों में दिन के बाद के समय में ब्लड शुगर को नियंत्रित करना अधिक मुश्किल हो सकता है। नियमित भोजन का समय और पर्याप्त नींद भी महत्वपूर्ण हैं।
इसलिए कोशिश करें कि रात का भोजन बहुत देर से न हो और रोजाना भोजन का समय अपेक्षाकृत नियमित रखें।
2. हाई ब्लड प्रेशर – बहुत ज्यादा नमक
खाने में जरूरत से ज्यादा नमक लेना हाई ब्लड प्रेशर के प्रमुख परिवर्तनीय जोखिम कारकों में से एक है। WHO के अनुसार, अधिक सोडियम का सेवन ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है और हृदय रोग तथा स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा सकता है। WHO वयस्कों के लिए प्रतिदिन 5 ग्राम से कम नमक लेने की सलाह देता है।
पैकेज्ड स्नैक्स, इंस्टेंट फूड और अधिक नमक वाले सॉस का सेवन भी सीमित करना उपयोगी हो सकता है।
3. माइग्रेन – खाना छोड़ना
कई लोगों में लंबे समय तक भूखे रहना या भोजन छोड़ना सिरदर्द को ट्रिगर कर सकता है। हालांकि माइग्रेन के ट्रिगर हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं।
इसलिए यदि आपको बार-बार माइग्रेन होता है, तो भोजन का नियमित पैटर्न बनाए रखना और यह नोट करना उपयोगी हो सकता है कि किन परिस्थितियों में सिरदर्द बढ़ता है।
4. हृदय रोग – शारीरिक गतिविधि की कमी
लंबे समय तक निष्क्रिय रहना स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। WHO के अनुसार, शारीरिक निष्क्रियता हृदय रोग, स्ट्रोक और टाइप-2 डायबिटीज जैसे रोगों के जोखिम से जुड़ी है।
रोजाना पैदल चलना, सीढ़ियों का उपयोग करना, व्यायाम या कोई पसंदीदा शारीरिक गतिविधि अपनाना लंबे समय में मददगार हो सकता है।
5. गैस्ट्राइटिस – बहुत तेजी से खाना
भोजन को बहुत तेजी से खाने से व्यक्ति जरूरत से ज्यादा भोजन कर सकता है और पाचन संबंधी असुविधा महसूस कर सकता है। धीरे-धीरे खाना, भोजन को अच्छी तरह चबाना और पर्याप्त समय लेकर भोजन करना बेहतर आदत है।
अगर पेट में लगातार दर्द, जलन, उल्टी या अन्य लक्षण बने रहते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
6. एसिड रिफ्लक्स – खाना खाने के तुरंत बाद लेटना
भोजन के तुरंत बाद लेटने से कुछ लोगों में एसिड रिफ्लक्स की समस्या बढ़ सकती है। खासकर भारी भोजन के बाद तुरंत बिस्तर पर जाने से बचना उपयोगी हो सकता है।
यदि आपको बार-बार सीने में जलन या खट्टी डकार की समस्या होती है, तो भोजन और सोने के बीच पर्याप्त अंतर रखना तथा चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
7. एनीमिया – खाने के साथ चाय पीना
चाय में मौजूद कुछ यौगिक भोजन से मिलने वाले आयरन के अवशोषण को प्रभावित कर सकते हैं। विशेष रूप से जिन लोगों में आयरन की कमी है, उनके लिए भोजन के आसपास चाय का समय महत्वपूर्ण हो सकता है।
अगर आपको एनीमिया या आयरन की कमी है, तो डॉक्टर या डाइटिशियन से पूछकर भोजन और चाय के बीच उचित अंतर रखना बेहतर रहेगा।
8. आंतों की समस्याएं – पर्याप्त पानी न पीना
पानी शरीर के सामान्य कार्यों के लिए जरूरी है। पर्याप्त तरल न लेने से कुछ लोगों में कब्ज और अन्य समस्याएं हो सकती हैं।
हालांकि हर व्यक्ति की पानी की जरूरत अलग होती है। मौसम, शारीरिक गतिविधि, उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार जरूरत बदल सकती है।
9. अस्थमा – धूल और प्रदूषित वातावरण
धूल, धुआं और अन्य वायु प्रदूषक कुछ लोगों में अस्थमा के लक्षणों को ट्रिगर कर सकते हैं। इसलिए जिन लोगों को अस्थमा है, उन्हें अपने ज्ञात triggers से बचने की कोशिश करनी चाहिए।
घर की नियमित सफाई, धूल से बचाव और प्रदूषित वातावरण में उचित सावधानी मददगार हो सकती है।
10. लिवर की समस्या – अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड
बहुत अधिक processed foods खाने की आदत अक्सर ज्यादा नमक, चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा के सेवन से जुड़ सकती है। WHO स्वस्थ आहार में अत्यधिक processed foods, अतिरिक्त चीनी, नमक और अस्वास्थ्यकर वसा को सीमित करने की सलाह देता है।
इसके बजाय फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करना बेहतर विकल्प हो सकता है।
11. Vitamin D की कमी – हमेशा घर के अंदर रहना
Vitamin D का एक प्रमुख स्रोत सूर्य के प्रकाश के संपर्क से शरीर में इसका बनना है। लगातार घर के अंदर रहना सूर्य के संपर्क को कम कर सकता है।
हालांकि Vitamin D की जरूरत और supplementation व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करती है। यदि आपको कमी का संदेह है, तो blood test और डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।
12. किडनी स्टोन – घंटों टीवी देखना
घंटों टीवी देखना सीधे तौर पर किडनी स्टोन का कारण नहीं कहा जा सकता। लेकिन लंबे समय तक बैठे रहना अक्सर कम शारीरिक गतिविधि और कभी-कभी कम पानी पीने जैसी आदतों से जुड़ा हो सकता है।
इसलिए लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में उठना, चलना और पर्याप्त तरल लेना अच्छी आदतें हैं।
13. अनिद्रा – रात में देर तक स्क्रीन इस्तेमाल करना
सोने से ठीक पहले मोबाइल, कंप्यूटर या टीवी की तेज रोशनी और मानसिक उत्तेजना नींद के पैटर्न को प्रभावित कर सकती है। NIH के NHLBI के अनुसार, टीवी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की रोशनी sleep-wake cycle को बाधित कर सकती है। वह सोने से पहले शांत समय बिताने और तेज कृत्रिम रोशनी से बचने की सलाह देता है।
इसलिए सोने से लगभग एक घंटे पहले स्क्रीन टाइम कम करना और नियमित sleep schedule रखना उपयोगी हो सकता है।
छोटी आदतें, बड़ा असर
स्वस्थ रहने के लिए केवल बीमारी होने के बाद इलाज करना पर्याप्त नहीं है। रोजाना की आदतों पर ध्यान देना भी महत्वपूर्ण है। कम नमक, संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी, नियमित शारीरिक गतिविधि, बेहतर नींद और स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना स्वास्थ्य की अच्छी नींव तैयार कर सकता है।
WHO के अनुसार, संतुलित आहार में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालों जैसे खाद्य पदार्थों को शामिल करना तथा नमक, अतिरिक्त चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा को सीमित करना महत्वपूर्ण है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली ऐसी health lists को अंतिम medical advice न मानें। यदि आपको लगातार सिरदर्द, पेट की समस्या, सांस लेने में परेशानी, नींद की समस्या, कमजोरी या कोई अन्य लक्षण हो रहा है, तो योग्य डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सुरक्षित कदम है।
