
29 जून 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सेशेल्स दौरा भारत की विदेश नीति और हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी रणनीतिक भूमिका के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ है। इस यात्रा के दौरान भारत और सेशेल्स के बीच डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष, समुद्री सुरक्षा और विकास सहयोग सहित कई महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी। प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स की संसद को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनकर एक नया इतिहास भी रचा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती रणनीतिक उपस्थिति और ‘नेबरहुड फर्स्ट’ तथा ‘सागर (Security and Growth for All in the Region)’ नीति को भी नई दिशा देता है।
संसद को संबोधित कर दिया विशेष संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और सेशेल्स केवल साझेदार देश नहीं बल्कि पुराने मित्र हैं। उन्होंने दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और समुद्री संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंद महासागर दोनों देशों को जोड़ने वाला साझा सेतु है।
उन्होंने लोकतंत्र, विकास, जलवायु परिवर्तन, समुद्री सुरक्षा तथा क्षेत्रीय सहयोग जैसे विषयों पर भी विस्तार से अपने विचार रखे। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
किन क्षेत्रों में हुए प्रमुख समझौते
इस दौरे के दौरान दोनों देशों ने कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
प्रमुख समझौते
- भारत के UPI डिजिटल भुगतान सिस्टम का विस्तार।
- स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग।
- अंतरिक्ष एवं उपग्रह तकनीक में साझेदारी।
- समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना।
- क्षमता निर्माण और कौशल विकास।
- विकास परियोजनाओं में भारत का सहयोग।
- शिक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी को बढ़ावा।
इन समझौतों से दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।
हिंद महासागर में भारत की रणनीति को मिलेगा बल
सेशेल्स हिंद महासागर क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण द्वीपीय देश है। यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री परिवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में भारत अपनी रणनीतिक उपस्थिति लगातार मजबूत कर रहा है ताकि समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियान, समुद्री डकैती पर नियंत्रण और मानवीय सहायता अभियानों को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
चीन की बढ़ती समुद्री गतिविधियों के बीच भारत अपने मित्र देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहा है।
राजनीतिक दृष्टि से क्यों है महत्वपूर्ण
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब भारत अपनी वैश्विक भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में लगातार सक्रिय है।
विदेश नीति के जानकारों के अनुसार इस यात्रा से कई महत्वपूर्ण संदेश गए हैं—
- हिंद महासागर में भारत की सक्रिय भूमिका।
- छोटे द्वीपीय देशों के साथ मजबूत साझेदारी।
- डिजिटल इंडिया मॉडल का वैश्विक विस्तार।
- विकास सहयोग को नई प्राथमिकता।
- क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा पर भारत का फोकस।
विपक्ष और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
सरकार ने इस यात्रा को भारत की कूटनीतिक सफलता बताया है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे उच्चस्तरीय विदेश दौरे भारत की वैश्विक छवि को मजबूत करते हैं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका को और प्रभावशाली बनाते हैं।
हालांकि विपक्ष ने सरकार से यह भी अपेक्षा जताई है कि विदेश नीति के साथ-साथ घरेलू आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाए।
आगे क्या
भारत और सेशेल्स के बीच हुए समझौतों के क्रियान्वयन पर अब दोनों देशों की एजेंसियां मिलकर काम करेंगी। आने वाले महीनों में डिजिटल भुगतान प्रणाली, स्वास्थ्य परियोजनाओं और समुद्री सुरक्षा से जुड़े कई संयुक्त कार्यक्रम शुरू किए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन समझौतों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है, तो यह न केवल दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाई देगा बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति भी और मजबूत होगी।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सेशेल्स दौरा केवल एक राजनयिक यात्रा नहीं बल्कि भारत की व्यापक समुद्री और वैश्विक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। संसद को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनने से लेकर डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में नए समझौतों तक, इस यात्रा ने भारत-सेशेल्स संबंधों को नई दिशा दी है। आने वाले वर्षों में इन पहलों का प्रभाव हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और भारत की वैश्विक भूमिका पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।
